
बिहार की राजनीति में रविवार को एक साफ़ और बड़ा संदेश चला गया। विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया। यह फैसला पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसकी अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद यादव ने की।
राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ नियुक्ति नहीं, बल्कि लीडरशिप ट्रांजिशन के तौर पर देखा जा रहा है।
लालू यादव का बैकसीट, तेजस्वी का फ्रंट रोल
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य और उम्र से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए लालू यादव ने रणनीतिक रूप से संगठन की कमान तेजस्वी के हाथों सौंप दी है। हालांकि वे अब भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन ऑपरेशनल कंट्रोल अब तेजस्वी के पास होगा।
साफ है— अब RJD का चेहरा, आवाज़ और दिशा Tejashwi-centric होगी।
संगठन सुधार और भविष्य की रणनीति
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में देश के 20 से ज्यादा राज्य अध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, विधायक, MLC और सांसद मौजूद रहे। पार्टी की चुनावी रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और ग्राउंड लेवल पर कमजोरी को लेकर खुलकर चर्चा हुई।
पार्टी नेतृत्व मानता है कि बिहार में RJD को फिर से धारदार विपक्ष और चुनावी विकल्प बनाना होगा।
चुनावी हार के बाद सख़्ती का मूड
विधानसभा चुनाव के बाद यह RJD की पहली बड़ी बैठक थी। सूत्र बताते हैं कि तेजस्वी यादव ने 300 से ज्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली है।

राज्य अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने तेजस्वी को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें उन नेताओं के नाम शामिल हैं जिन पर ढीलापन, गुटबाज़ी और निष्क्रियता का आरोप है।
मतलब साफ है—अब संगठन में “परिवार नहीं, परफॉर्मेंस” का फार्मूला लागू होगा।
नीतीश सरकार पर तेजस्वी का सीधा हमला
हालांकि तेजस्वी ने पहले कहा था कि नीतीश सरकार के पहले 100 दिनों तक वे बयानबाज़ी से दूर रहेंगे, लेकिन अब उन्होंने कानून-व्यवस्था और बढ़ते अपराध को लेकर नीतीश कुमार और BJP पर तीखा हमला बोला है।
RJD में अब संदेश साफ है— लालू विरासत हैं, तेजस्वी भविष्य।
अब देखना यह है कि क्या तेजस्वी संगठन को सिर्फ संभालेंगे या बिहार की सत्ता की स्क्रिप्ट भी दोबारा लिखेंगे?
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